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बुधवार, 3 अगस्त 2022
घोड़े_की_नाल
शनिवार, 30 जुलाई 2022
शिवजी को प्रिय हैं ये फूल
शिवजी को प्रिय हैं ये फूल
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मदार, चमेली, बेला, हरसिंगार, गुलाब, अलसी, जूही और धतूरे जैसे फूल भगवान शिव को अतिप्रिय होते हैं. सभी फूलों से अलग-अलग मनोकामनाएं जुड़ी होती हैं. आप अपनी मनोकामना व इच्छानुसार शिवजी को सावन में ये फूल जरूर चढ़ाएं.
जानें किस मनोकामना के लिए चढ़ाएं कौन सा फूल
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चमेली-
सावन में शिवजी को चमेली का फूल चढ़ाने से व्यक्ति की मनोकामना पूरी होती है.
बेला-
शिवजी की विशेष पूजा में बेला फूल चढ़ाना चाहिए. इससे भगवान प्रसन्न होते हैं और आपको मनचाहे जीवनसाथी का वरदान देते हैं.
हरसिंगार-
सावन में शिवजी की पूजा करते समय हरसिंगार का फूल चढ़ाना अत्यंत शुभ माना जाता है. इस फूल को चढ़ाने से सुख-समृद्धि और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है.
मदार-
शिवजी की पूजा करते समय मदार के फूल जरूर चढ़ाएं. इसे आक और आंकड़े जैसे नामों से भी जाना जाता है. शिवजी को मदार के फूल चढ़ाने से मोक्ष की प्राप्ति होती है.
धतूरा-
शिवजी को धतूरा अत्यंत प्रिय होता है. धतूरे के बिना शिवजी की पूजा अधूरी मानी जाती है. सावन में शिवजी की पूजा करते समय धतूरे के फल के साथ ही फूल भी चढ़ाना चाहिए. इससे संतान की प्राप्ति होती है.
गुलाब-
धन-समृद्धि के लिए सावन में शिवजी को गुलाब के फूल चढ़ाएं.
जूही- जूही के फूल से पूजा करने पर नौकरी-व्यापार में तरक्की होती है और धन संबंधी परेशानियां दूर होती है.
अलसी-
सावन में अलसी के फूल से शिवजी की पूजा करने से व्यक्ति के सभी पाप दूर होते हैं.संकलित पोस्ट
*🅹🆂🅼 🅾🆂🅶🆈*
#राहुलनाथ ™ भिलाई 🖋️
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#चेतावनी:-इस लेख में वर्णित नियम ,सूत्र,व्याख्याए,तथ्य स्वयं के अभ्यास-अनुभव के आधार पर एवं गुरू-साधु-संतों के कथन,ज्योतिष-वास्तु-वैदिक-तांत्रिक-आध्यात्मिक-साबरी ग्रंथो,
मान्यताओं और जानकारियों के आधार पर मात्र शैक्षणिक उद्देश्यों हेतु दी जाती है।हम इनकी पुष्टी नही करते,अतः बिना गुरु के निर्देशन के साधनाए या प्रयोग ना करे। किसी भी विवाद की स्थिति न्यायलय क्षेत्र दुर्ग छत्तीसगढ़,भारत।
शनिवार, 23 जुलाई 2022
#सर्वसिद्धिप्रद_बगलामुखी_मंत्र_एवं_श्री_बगलाष्टोत्तर_शतनामस्तोत्रम
#सर्वसिद्धिप्रद_बगलामुखी_मंत्र_एवं_श्री_बगलाष्टोत्तर_शतनामस्तोत्रम
माँ भगवती श्री बगलामुखी का महत्व समस्त देवियों में सबसे विशिष्ट है।
माँ बगलामुखी यंत्र मुकदमों में सफलता तथा सभी प्रकार की उन्नति के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। कहते हैं इस यंत्र में इतनी क्षमता है कि यह भयंकर तूफान से भी टक्कर लेने में समर्थ है।
माहात्म्य- सतयुग में एक समय भीषण तूफान उठा। इसके परिणामों से चिंतित हो भगवान विष्णु ने तप करने की ठानी। उन्होंने सौराष्ट्र प्रदेश में हरिद्रा नामक सरोवर के किनारे कठोर तप किया। इसी तप के फलस्वरूप सरोवर में से भगवती बगलामुखी का अवतरण हुआ। हरिद्रा यानी हल्दी होता है। अत: माँ बगलामुखी के वस्त्र एवं पूजन सामग्री सभी पीले रंग के होते हैं। बगलामुखी मंत्र के जप के लिए भी हल्दी की माला का प्रयोग होता है।
प्रभावशाली मंत्र माँ बगलामुखी
#विनियोग -
अस्य : श्री ब्रह्मास्त्र-विद्या बगलामुख्या नारद ऋषये नम: शिरसि।
त्रिष्टुप् छन्दसे नमो मुखे। श्री बगलामुखी दैवतायै नमो ह्रदये।
ह्रीं बीजाय नमो गुह्ये। स्वाहा शक्तये नम: पाद्यो:।
ऊँ नम: सर्वांगं श्री बगलामुखी देवता प्रसाद सिद्धयर्थ न्यासे विनियोग:।
#आवाहन
ऊँ ऐं ह्रीं श्रीं बगलामुखी सर्वदृष्टानां मुखं स्तम्भिनि सकल मनोहारिणी अम्बिके इहागच्छ सन्निधि कुरू सर्वार्थ साधय साधय स्वाहा ।
#ध्यान
सौवर्णामनसंस्थितां त्रिनयनां पीतांशुकोल्लसिनीम्
हेमावांगरूचि शशांक मुकुटां सच्चम्पकस्रग्युताम्
हस्तैर्मुद़गर पाशवज्ररसना सम्बि भ्रति भूषणै
व्याप्तांगी बगलामुखी त्रिजगतां सस्तम्भिनौ चिन्तयेत्।
#मंत्र
ऊँ ह्रीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां
वाचं मुखं पदं स्तंभय जिह्ववां कीलय
बुद्धि विनाशय ह्रीं ओम् स्वाहा।
इन छत्तीस अक्षरों वाले मंत्र में अद्भुत प्रभाव है। इसको एक लाख जाप द्वारा सिद्ध किया जाता है। अधिक सिद्धि हेतु पाँच लाख जप भी किए जा सकते हैं। जप की संपूर्णता के पश्चात् दशांश यज्ञ एवं दशांश तर्पण भी आवश्यक है।
मां पीताम्बरा कि अमोघ और अभेद्य कृपा से परिवार सुरक्षित रहे इस हेतु श्रीबगलामुखी शतनाम स्तोत्र के रोजाना १५ पाठ करे किसी विशिष्ट कार्य हेतु दस दिन मे एक हजार पाठ करे |यदि आप नित्य पाठ करने में सक्षम नही तो इनका पाठ विधि अनुसार योग्य साधक या भक्त से करवाये।
|| जय मां पीताम्बरा ||
#सर्वसिद्धिप्रद_श्री_बगलाष्टोत्तर_शतनामस्तोत्रम_॥
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#श्रीर्जयति ||
#ध्यानम्
गंभीरां च मदोन्मत्तां स्वर्णकांतिसमप्रभाम् ।
चतुर्भुजां त्रिनयनां कमलासनसंस्थिताम् ॥
मुद्गरं दक्षिणे पाशं वामे जिह्वां च बिभ्रतीं |
पीतांबरधरां देवीं दृढपीनपयोधराम् ||
ओम् ब्रह्मास्त्र-रूपिणी देवी माता श्रीबगलामुखी । चिच्छक्तिर्ज्ञान-रूपा च ब्रह्मानन्दप्रदायिनी ॥१॥
महाविद्या महालक्ष्मी श्रीमत्त्रिपुरसुन्दरी ।
भुवनेशी जगन्माता पार्वती सर्वमङ्गला ॥२॥
ललिता भैरवी शान्ता अन्नपूर्णा कुलेश्वरी ।
वाराही छिन्नमस्ता च तारा काली सरस्वती ॥३॥
जगत्पूज्या महामाया कामेशी भगमालिनी ।
दक्षपुत्री शिवाङ्कस्था शिवरूपा शिवप्रिया ॥४॥
सर्वसम्पत्करी देवी सर्वलोक-वशङ्करी ।
वेदविद्या महापूज्या भक्ताद्वेषी भयङ्करी ॥५॥
स्तम्भरूपा स्तम्भिनी च दुष्टस्तम्भनकारिणी ।
भक्तप्रिया महाभोगा श्रीविद्या ललिताम्बिका ॥६॥
मेनापुत्री शिवानन्दा मातङ्गी भुवनेश्वरी ।
नारसिंही नरेन्द्रा च नृपाराध्या नरोत्तमा ॥७॥
नागिनी नागपुत्री च नगराजसुता उमा ।
पीताम्बरा पीतपुष्पा च पीतवस्त्रप्रिया शुभा ॥८॥
पीतगन्धप्रिया रामा पीतरत्नार्चिता शिवा ।
अर्द्धचन्द्रधरी देवी गदामुद्गरधारिणी ॥९॥
सावित्री त्रिपदा शुद्धा सद्योरागविवर्द्धिनी ।
विष्णुरूपा जगन्मोहा ब्रह्मरूपा हरिप्रिया ॥१०॥
रुद्ररूपा रुद्रशक्तिश्चिन्मयी भक्तवत्सला ।
लोकमाता शिवा सन्ध्या शिवपूजनतत्परा ॥११॥
धनाध्यक्षा धनेशी च धर्मदा धनदा धना ।
चण्डदर्पहरी देवी शुम्भासुरनिबर्हिणी ॥१२॥
राजराजेश्वरी देवी महिषासुरमर्दिनी ।
मधुकैटभहन्त्री च रक्तबीजविनाशिनी ॥१३॥
धूम्राक्षदैत्यहन्त्री च भण्डासुरविनाशिनी ।
रेणुपुत्री महामाया भ्रामरी भ्रमराम्बिका ॥१४॥
ज्वालामुखी भद्रकाली बगला शत्रुनाशिनी ।
इन्द्राणी इन्द्रपूज्या च गुहमाता गुणेश्वरी ॥१५॥
वज्रपाशधरा देवी जिह्वामुद्गरधारिणी ।
भक्तानन्दकरी देवी बगला परमेश्वरी ॥१६॥
#फलश्रुती
अष्टोत्तरशतं नाम्नां बगलायास्तु य: पठेत् । रिपुबाधाविनिर्मुक्त: लक्ष्मीस्थैर्यमवाप्नुयात् ॥
भूतप्रेतपिशाचाश्च ग्रहपीडानिवारणम् ।
राजानो वशमायान्ति सर्वैश्वर्यं च विन्दति ॥
नानाविद्यां च लभते राज्यं प्राप्नोति निश्चितम् । भुक्तिमुक्तिमवाप्नोति साक्षात् शिवसमो भवेत् ॥
॥ इतिश्री रुद्रयामले सर्वसिद्धिप्रद-श्री-बगलाष्टोत्तर-शतनामस्तोत्रम् ॥
*🅹🆂🅼 🅾🆂🅶🆈*
🕉️🙏🏻🚩आदेश-जयश्री माहाँकाल 🚩🙏🏻🕉️
#राहुलनाथ™ भिलाई 🖋️
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#चेतावनी:-इस लेख में वर्णित नियम ,सूत्र,व्याख्याए,तथ्य स्वयं के अभ्यास-अनुभव के आधार पर एवं गुरू-साधु-संतों के कथन,ज्योतिष-वास्तु-वैदिक-तांत्रिक-आध्यात्मिक-साबरी ग्रंथो,
मान्यताओं और जानकारियों के आधार पर मात्र शैक्षणिक उद्देश्यों हेतु दी जाती है।हम इनकी पुष्टी नही करते,अतः बिना गुरु के निर्देशन के साधनाए या प्रयोग ना करे। किसी भी विवाद की स्थिति न्यायलय क्षेत्र दुर्ग छत्तीसगढ़,भारत।