बुधवार, 12 जनवरी 2022

बगला_प्रत्यंगिरा_कवच

#बगला_प्रत्यंगिरा_कवच
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विनियोग
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अस्य श्री बगलाप्रत्यंगिरामन्त्रस्य नारद ऋषिस्त्रिष्टुप छन्दः प्रत्यंगिरा देवता ह्लीं बीजं, हूं शक्तिः ह्रीं कीलकम् ह्लीं ह्लीं ह्लीं प्रत्यंगिरा मम शत्रुविनाशे विनियोगः ।
 ||ॐ प्रत्यंगिरायै नमः प्रत्यांगिरे सकलकामान् साधय मम रक्षा कुरू कुरू सर्वान् शत्रुन् खादय खादय मारय मारय घातय घातय ॐ ह्रीं फट् स्वाहा ||

ॐ भ्रामरी स्तंभिनि देवी क्षोभिणि मोहिनी तथा ।
संहारिणी द्राविणि च जृम्भिणी रौद्ररूपिणि ।।
इत्यष्टौ शक्तयो देवी शत्रु पक्षे नियोजिताः ।
धारयेत् कण्ठदेशे च सर्वशत्रु विनाशिनीः ।।

ॐ ह्लीं भ्रामरी मम शत्रुन् भ्रामय भ्रामय ॐ ह्लीं स्वाहा।।
ॐ ह्लीं स्तंभिनि मम शत्रुन् स्तम्भय स्तम्भय ॐ ह्लीं स्वाहा।।
ॐ ह्लीं क्षोभिणि मम शत्रुन् क्षोभय क्षोभय ॐ ह्लीं स्वाहा।।
ॐ ह्लीं मोहिनी मम शत्रुन् मोहय मोहय ॐ ह्लीं स्वाहा।।
ॐ ह्लीं संहारिणी मम शत्रुन् संहारय संहारय ॐ ह्लीं स्वाहा।।
ॐ ह्लीं द्राविणि मम शत्रुन् द्रावय द्रावय ॐ ह्लीं स्वाहा।।
ॐ ह्लीं जृम्भिणी मम शत्रुन् जृम्भय जृम्भय ॐ ह्लीं स्वाहा।।
ॐ ह्लीं रौद्रि मम शत्रुन् संतापय संतापय ॐ ह्लीं स्वाहा।।

इयं विद्या महाविद्या सर्वशत्रु निवारिणी ।
धारिता साधकेन्द्रस्य सर्वान दुष्टान् विनाशयेत् ।।
त्रिसन्ध्यामेकसंध्यं वा यः पठेत्स्थिर मानसः ।
न तस्य दुर्लभं लोके कल्पवृक्ष इव स्थितः ।।
यं यं स्पृशति हस्तेन यं यं पश्यति चक्षुषाः ।
स एव दासतां याति सारात्सारमिमं मनुं ।।
।।इतिश्री बगलाप्रत्यंगिराकवच सम्पूर्णं।।
🙏🏻🚩जयश्री महाकाल  🚩🙏🏻
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इस लेख में वर्णित नियम ,सूत्र,व्याख्याए,तथ्य गुरू एवं साधु-संतों के कथन,ज्योतिष-तांत्रिक-आध्यात्मिक-साबरी ग्रंथो एवं स्वयं के अभ्यास अनुभव के आधार पर मात्र शैक्षणिक उद्देश्यों हेतु दी जाती है।अतः बिना गुरु के निर्देशन के साधनाए या प्रयोग ना करे।विवाद की स्थिति में न्यायलय क्षेत्र दुर्ग छत्तीसगढ़,भारत

शाबर_मंत्र_महिमा-03

#शाबर_मंत्र_महिमा-03
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#सत_नमो_आदेश_गुरुजी_को_आदेश_ॐ_गुरुजी
758वर्ष पूर्व ली गई गुरुदेव मछिंद्रनाथजी की समाधि का जीर्णोद्धार सुलह स्थित भेडू महादेव की पंचायत डरोह के कस्बा गांव में प्राचीन शिव मंदिर से चालीस फीट दूरी पर श्री मछिंद्रनाथनाथजी की समाधि स्थित है। इस समाधि पर अंकित पटि्टका पर मछिंद्रनाथजी ने 25 दिसंबर 1263 इसवी मंगलवार सायं 4:00 बजे जीवित अवस्था में समाधि ली थी। यह समाधि समय के साथ झाड़ियों से ढक गई थी। जिसकी वजह से यह समाधि नहीं दिखती थी और इसके चारों ओर गंदगी ही गंदगी फैली हुई थी।
अब कुछ समय पहले श्रीनाथ सम्प्रदाय के शिष्यों ने यहां आकर समाधि की चारों तरफ सफाई की और इसका जीर्णोद्धार किया। अब इस समाधि पर दूर दूर से पर्यटक आने जाने लगे हैं और इस जगह की रौनक बढ़ गई है। श्रीनाथजी की समाधि के विषय मे कोई एक स्थान नहीं कहा जा सकता क्योंकि मैंने एक समाधि श्रीमत्स्येन्द्रनाथजी की अवंतिका नगरी उज्जैनी में भी देखी है जो उज्जैन के गढ़कालिका के पास स्थित है। हालांकि कुछ लोग मानते हैं कि मछिंद्रनाथ की समाधि मछीन्द्रगढ़ में है, जो महाराष्ट्र के जिला सावरगाव के ग्राम मायंबा गांव के निकट है और सुना है कि एक समाधि महाराष्ट्र के औरंगाबाद के पास मिटमिटा गाँवों में भी है जो भी हो हमारे लिए सभी समाधि स्थल गुरुस्थान होने के कारण पूज्यनीय है।मत्स्येंद्रनाथजी द्वारा लिखित ‘कौल ज्ञान निर्णय’ ग्रंथ का लिपिकाल निश्चित रूप से सिद्घ कर देता है कि मत्स्येंद्रनाथ ग्यारहवीं शताब्दी के पूर्ववर्ती हैं।

 भारत में नाथ योगियों की परंपरा बहुत ही प्राचीन रही है। नाथ समाज हिन्दू धर्म का एक अभिन्न अंग है। नौ नाथों की परंपरा से 84 नाथ हुए। नौ नाथों के संबंध में विद्वानों में मतभेद हैं।भगवान शंकर को आदिनाथ और दत्तात्रेय को आदिगुरु माना जाता है। इन्हीं से आगे चलकर नौ नाथ और नौ नाथ से 84 नाथ सिद्धों की परंपरा शुरू हुई। 

मत्स्येंद्र , जिसे मत्स्येंद्रनाथ , मच्छिंद्रनाथ ,मछन्दरनाथ,मुन्नानाथ और मिनापा के रूप में भी जाना जाता है , श्रीमत्स्येंद्रनाथजी कई बौद्ध और हिंदू परंपराओं में एक संत और योगी थे । उन्हें पारंपरिक रूप से हठ योग के पुनरुत्थानवादी और साथ ही इसके कुछ शुरुआती ग्रंथों के लेखक के रूप में भी माना जाता रहा है ।इन्हें नाथा सम्प्रदाय के संस्थापक के रूप में भी देखा जाता हैं कहा जाता है कि श्रीनाथजी ने भगवान शिव से शिक्षाओ को प्राप्त किया था।श्रीनाथजी विशेष रूप से कौल शैववाद से जुड़े थे ।श्रीनाथ जी का नवनाथों( महासिद्धों)में स्थान प्राप्त है।
कौल ज्ञान निर्णय के अनुसार मत्स्येंद्रनाथ ही कौलमार्ग के प्रथम प्रवर्तक थे। कुल का अर्थ है शक्ति और अकुल का अर्थ शिव। मत्स्येन्द्र के गुरु दत्तात्रेय थे।

मत्स्येंद्रनाथजी को हठ और तांत्रिक रचनाओं की रचना करने का श्रेय दिया जाता है जैसे कौलजनानिर्णय ("कौला परंपरा से संबंधित ज्ञान की चर्चा"), मत्स्येंद्रसंहिता और "अकुला-विरतंत्र", संस्कृत में हठ योग पर कुछ शुरुआती ग्रंथ हैं । ग्यारहवीं शताब्दी के जेम्स मॉलिंसन, एलेक्सिस सैंडरसन , डेविड गॉर्डन व्हाइट और अन्य लोगों का मानना ​​है कि मरणोपरांत कई कार्यों का श्रेय उन्हें दिया गया।सत्य क्या है इनका मुझे ज्ञान नही है।पद्म, स्कन्द शिव ब्रह्मण्ड आदि पुराण, तंत्र महापर्व आदि तांत्रिक ग्रंथ बृहदारण्याक आदि उपनिषदों में तथा और दूसरे प्राचीन ग्रंथ रत्नों में श्रीनाथ सम्प्रदाय एवं श्री गुरु गोरक्षनाथ की कथायें बडे सुचारु रुप से मिलती है।
श्रीनाथ सम्प्रदाय भारत का परम प्राचीन, उदार, ऊँच-नीच की भावना से परे एंव अवधूत अथवा योगियों का सम्प्रदाय है।
श्रीनाथजी के चेलों की सूची, विभिन्न मंदिरों और प्रजातियों के बीच भिन्न-भिन्न   हो सकती है।किन्तु सामान्य रूप से शामिल सूची प्रस्तूत है।  

मच्छिंद्र गोरक्ष जालीन्दराच्छ।। कनीफ श्री चर्पट नागनाथ:।।
श्री भर्तरी रेवण गैनिनामान।। नमामि सर्वात नवनाथ सिद्धान।।

।।श्री नवनाथ मंत्र एवं नाम।।
।।ॐ श्रीनवनाथाय नमः,।।
श्री दत्तात्रेये नमः,
श्रीआदिनाथाय नमः
श्रीमत्स्येंद्रनाथाय नमः
श्री गोरक्षनाथाय नमः
श्रीजालंधरनाथाय नमः
श्रीकानिफनाथाय नमः
श्री चर्पटीनाथाय नमः
श्रीनागनाथाय नमः
श्रीभर्तृहरिनाथाय नमः
श्रीरेवण नाथाय नमः
श्रीगहनीनाथाय नम
श्रीनव नाथाय नमः
(श्रीनावनाथ भक्तिसार अनुसार)
आदि हो सकती है।मत्स्येंद्रनाथजी के साथ सभी नवनाथ कहे जाते है ।जबकि श्रीगोरक्षनाथजी को आम तौर पर  श्रीनाथजी का प्रत्यक्ष शिष्य माना जाता है।श्रीआदिनाथजी
श्रीउदयनाथजी
श्रीसत्यनाथजी
श्रीसन्तोष नाथजी
श्रीअचल अचम्भे नाथजी
श्रीगजबेली गजकंथडनाथजी
श्रीचौरंगी नाथजी(एवं 
श्री मछेन्द्रनाथजी
श्रीगुरु गोरक्षनाथजी
(द्वारा:-श्रीविलासनाथजी कृत श्रीनाथ रहस्य)
 से ली गई है।जो कि नाथो की सही सूची प्रतीत होती है।

इसके अलावा ये भी हैं:
1. आदिनाथ 2. मीनानाथ 3. गोरखनाथ 4.खपरनाथ 5.सतनाथ 6.बालकनाथ 7.गोलक नाथ 8.बिरुपक्षनाथ 9.भर्तृहरि नाथ 10.अईनाथ 11.खेरची नाथ 12.रामचंद्रनाथ।
ओंकार नाथ, उदय नाथ, सन्तोष नाथ, अचल नाथ, गजबेली नाथ, ज्ञान नाथ, चौरंगी नाथ, मत्स्येन्द्र नाथ और गुरु गोरक्षनाथ। सम्भव है यह उपयुक्त नाथों के ही दूसरे नाम है। बाबा शिलनाथ, दादाधूनी वाले, , गोगा नाथ, पंढरीनाथ और श्री स्वामी समर्थ, गजानन महाराज, साईं बाबा को भी नाथ परंपरा का माना जाता है। भगवान भैरवनाथ भी नाथ संप्रदाय के अग्रज माने जाते हैं। और विशेष इन्हे योगी भी कहते और जोगी भी कहा जाता हैं। देवो के देव महादेव जी स्वयं शिव जी ने नवनाथो को खुद का नाम जोगी दिया हैं। इन्हें तो नाथो के नाथ नवनाथ भी कहा जाता हैं।द्वारा विकिपीडिया

#विशेष:-इस पोस्ट को लिखने के लिए कुछ व्हाट्सएप पोस्ट एवं अलग-अलग साबर साहित्य का उपयोग किया गया है ऐसे में त्रुटि होने की संभावना हो सकती है कृपया गुरुजन मुझे क्षमा करते हुए मेरा  मार्ग प्रशस्त कर साहित्य की त्रुटियों से अवगत कराएं जिससे कि लेख में भविष्य में सुधार किया जा सके।
#क्रमशः-
🙏🏻🚩जयश्री महाकाल🚩🙏🏻
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शाबर_मंत्र_महिमा-02

#शाबर_मंत्र_महिमा-02
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जब प्राचीन काल के ग्रंथों में उल्लेखित शास्त्रोक्त मंत्रों का दुरूपयोग होने लगा तब महर्षि विश्वामित्र के द्वारा शास्त्रोक्त मंत्रों को श्रापित तथा किलीत कर दिया गया तब से शास्त्रोक्त मंत्र की साधना तथा प्रयोग से सामान्य जन वंचित होने लगे तथा विशेष गुरू कृपा से प्राप्त मंत्र ही साधकों के लिए फलदायी होते थे। तथा अनेकों प्रकार के कठिनाईयों के बावजूद सिद्धीयाँ प्राप्त होती थी तथा सामान्य साधक शास्त्रोक्त मंत्रों के प्रभाव से वंचित रह जाते थे। यह देखकर भगवान शंकर द्वारा कलयुग के साधकों के हित को ध्यान में रखते हुए शाबर मंत्रों का निर्माण किया गया। उसके बाद नवनाथ संप्रदायों के द्वारा शाबर मंत्र के प्रचलन को आगे बढ़ाया गया।
 शाबर मंत्रों की उत्पत्ति और रचना के बारे में पुराणों में वर्णन मिलता है कि भगवान शंकर और माता पार्वती ने जिस समय अजुर्न के साथ किरत वेश में युद्ध किया था उसी समय आगम चर्चा के दौरान माता पार्वती जी के प्रश्नों के उत्तर शिवजी ने दिये थे उन्ही भिन्न प्रदत मंत्रों को बाद में शाबर मंत्र कहा गया।
सबसे अच्छी बात है कि शाबर साधनाओ में न तो विशेश विधि विधान की आवश्यकता है और नही किसी कर्मकांड की, इन साधना कि विधि सरल होने के साथ शीघ्र फलदायी भीहै..... अतः किसी भी वर्ग के व्यक्ति कर सकते हैं..... गुरु की आज्ञा, गुरु की कृपा के बिना कोई भी मन्त्र या तंत्र या सिद्धि संभव नहीं अतः प्रथम गुरु पूजन, और मानसिक रूप से आशीर्वाद लेकर ही किसी भी साधना में प्रवर्त होना चाहिए, यही शिष्य या साधक का कर्म और धर्म होना चाहिए.
शाबर मंत्र सरल तथा तीव्र प्रभावी होता है। शाबर मंत्रों की खासियत यह है कि मंत्रों के आखिर में मंत्र से संबंधित देवी देवताओं के आन अथवा कसम दी जाती है। जिससे देवी-देवताओं को कसम की मर्यादा रखने के लिए साधक के इच्छित कार्यां को पूरा करना पड़ता है।

भक्तों को साधना काल में निम्न नियमों का पालन अनिवार्य है:-
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१. सर्वश्रेष्ट तो यह है की आप गुरु खोजें और उससे मंत्र प्राप्त करें.
२. साधना काल में वाणी का असंतुलन, कटु-भाषण, प्रलाप, मिथ्या वचन आदि का त्याग करें। मौन रहने की कोशिश करें।
३.निरंतर मंत्र जप अथवा इष्‍ट देवता का स्मरण-चिंतन करना जरूरी होता है।
४.जिसकी साधना की जा रही हो, उसके प्रति मन में पूर्ण आस्था रखें।
५.मंत्र-साधना के प्रति दृढ़ इच्छा शक्ति धारण करें।
६.साधना-स्थल के प्रति दृढ़ इच्छा शक्ति के साथ साधना का स्थान, सामाजिक और पारिवारिक संपर्क से अलग होना जरूरी है।
७.उपवास में दूध-फल आदि का सात्विक भोजन लिया जाए।
८.श्रृंगारप्रसाधन और कर्म व विलासिता का त्याग अतिआवश्यक है।
९.साधना काल में भूमि शयन ही करना चाहिये।

शाबर मंत्र साधना में गुरु की आवश्यकता
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१.शाबर मंत्र साधना के लिए गुरु धारण करना श्रेष्ट होता है.
२.गुरु साधना से उठनेवाली उर्जा को नियंत्रित और संतुलित करता है जिससे साधना में जल्दी सफलता मिल जाती है.
३. वैसे ये साधनाएँ बिना गुरु के भी की जा सकती हैं.
४.शाबर साधना गुरु के आभाव में करने से पहले अपने इष्ट या भगवान शिव के मंत्र का एक पुरस्चरण यानि १,२५,००० जाप कर लेना चाहिए.
५.इसके अलावा हनुमान चालीसा का नित्य पाठ भी लाभदायक हो
सभी शाबर मंत्रों को सिद्ध करने से पहले शाबर मंत्र विधान द्वारा गुरू और गणेश की पूजा आराधना करनी चाहिए। तत्पश्चात् शरीर रक्षा मंत्रों के द्वारा शरीर की सुरक्षा कर लेनी चाहिए।
विशेष:-इस पोस्ट को लिखने में कुछ व्हाट्सएप पोस्ट का सहयोग लिया गया है।
🙏🏻🚩जयश्री महाकाल🚩🙏🏻
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शाबर_मंत्र_महीमा

#शाबर_मंत्र_महीमा-01
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गंगाजल में #अमृत देखाई नहीं देता, सती का #तेज देखाई नहीं देता,दूध में #मक्खन दिखाई नही देता,जति का #सवरूप देखाई नहीं देता, पत्थर में #भगवान् देखाई नहीं देता,फलों में #रस दिखाई नही देता,
ठीक उसी प्रकार शाबर मन्त्रों कि अदभूत #शक्ति दिखाई नहीं देती। परन्तु उच्चारण की शुद्धता,चरित्र की पवित्रता एवं गुरु आशीर्वाद से प्रयोग कर और आज़मा कर देखिये - दुनिया को हिला कर रख दे ऐसी शक्ति इन शाबर मंत्रों में समाई हुई है होती है।
माना जाता है कि जितने भी देवी-देवता के साबर मंत्र है उनके रचयिता श्रीनाथजी गुरुगोरखनाथ ही है।श्रीनाथजी के अनुसार सिद्धियों के पार जाकर शून्य समाधि में स्थिर होना ही योगी का परम लक्ष्य होना चाहिए।
श्रीनाथ सम्प्रदाय के लोग जब भी मिलते है वे आपस मे #आदेश सबद का उपयोग करते है।
छायाचित्र व्हाट्सएप द्वारा संग्रहित।।
।।क्रमशः।।

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धन_के_नुकसा_से_कैसे_बचें_एवं_धन_प्राप्ति_उपाय

#धन_के_नुकसा_से_कैसे_बचें_एवं_धन_प्राप्ति_उपाय
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#धन_के_नुकसा_से_कैसे_बचें :
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आप पूरी मेहनत करते है किंतु फिर भी बेवजह धन का नुकसान हो रहा है।काम करने वाले श्रमिक सही कार्य नही करते,बार-बार धन चोरी हो रहा है धन व्यवसाय में डूब रहा है या गायब हो जाता है।जो धन उधार ले रहा है वो वापस नही करता इत्यादि।तो इसका सर्वोत्तम उपाय है।की

#उपाय:-
(१)प्रातः काल मे नीम की लकड़ी से दातुन करें।
(२)रात को झूठे बर्तन किचन में न रखें।
(३)उत्तर दिशा में बैठकर ही भोजन करें।
(४)भोजन की थाली में हाथ न धोएं।

#धन_प्राप्ति_का_उपाय :
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(१)पहला उपाय यदि आप का लक्ष्य धन कमाना हैं तो यह उपाय आपका सहयोग कर सकता है।काली मिर्च के 5 दाने लें और उन्हें अपने सिर पर से 7 बार वार लें। इसके बाद किसी चौराहे या किसी सुनसान स्थान पर खड़े होकर चारों दिशाओं में 4 दाने फेंक दें। इसके बाद 5वें दाने को ऊपर आसमान की ओर उछाल दें। इसके बाद पुन: लौटते समय पीछे पलटकर न देंगे। माना जाता है कि इस उपाय से अचानक धन प्राप्ति के योग बनते हैं।आसान उपाय है एक बार अवश्य कर के देखे।।

(२)दूसरा उपाय यह कि १०-१० के या १००-१०० के १०० अच्छे नोट (कौन से नोट लेना है वो आपकीं अपनी सक्षमता पव निर्भर करता रहता)इकट्ठे करें एवं 100 सिक्के जो 1-2 या 5 रु के हो,उनको तिजोरी में सुरक्षित रखें। इस नोट की गड्डी को किसी का स्पर्श ना हो इसका ख्याल रखे।इन्हें रोज प्रतिदिन रात में सोने से पहले गिनकर उचित स्थान पर रख दें। हो सके तो नोटों के ढेर का एक चित्र खरीदकर ले आएं  और उसे घर में वहां पर चिपका दें जहां पर आपकी नजर सहज ही रूप से जाती हो।आजकल मोबाइल तो सबके पास होता है तो मोबाइल स्क्रीन पे नोट के ढेर का चित्र अवश्य लगाए।ये पूर्णतः वैज्ञानिक विधि द्वारा संदेश अवचेतन मन तक पहुचाने का प्रयास है।कुछ दिन इस उपाय को करे और इसका चमत्कारी असर देखे।

#भाग्य_चमकाने_का_अचूक_उपाय
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मंगलवार या शनिवार को एक पानी वाला नारियल लीजिये एवं उसे ऊपर से नीचे की ओर २१ बार उतार कर,किसी मंदिर की अग्नि या हवन में अपने नाम-गोत्र का उच्चारण कर समर्पित कर दे।इस उपाय को कम से कम 5 बार अवश्य करे।इस उपाय में इस्तेमाल हो रहे नारियल को घर के सभी सदस्यों के ऊपर से भी उतारा जा सकता है।इस उपाय से किसी भी प्रकार की ऊपरी बाधा, टोना-टोटका,नजर आदि का शमन हो जाता है और भाग्य का उदय होता है किंतु इसके साथ-साथ मेहनत करना भी आवश्यक है घर बैठे,बिना परिश्रम के कोई भी उपाय कार्य नही करता।ये अटल सत्य है।
#विशेष:-
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इन उपायों का उपयोग करने मैंने बहुत से भक्तो को कहा,या समझे की उपाय भक्तो को प्रदान किये।70%भक्तो से उपाय के बाद सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुए।आप भी मेहनत करे,लगातार प्रयास करे,साथ-साथ धार्मिक, ऋषि-मुनियो द्वारा प्रदत्त उपायों की मदद ले ।बाकी गुरुदेव एवं भगवान माहाँकाल आपकीं इच्छा अवश्य पूरी करेंगे।ऐसी आशा है और विनती भी।

🙏🏻🚩जयश्री महाकाल🚩🙏🏻
●●●●●लेखक एवं संकलनकर्ता:-●●●●●
।। राहुलनाथ।।™ (ज्योतिष एवं वास्तुशास्त्री)
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बुधवार, 5 जनवरी 2022

दु:ह स्वप्न( बुरा सपना)देखने का उपचार

दु:ह स्वप्न( बुरा सपना)देखने का उपचार
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प्रिय एवं आदरणीय मित्रो,
कभी कभी हम ऐसे दु:ह स्वप्नों को देखते है जिसके कारण ण विचलीत ,व्याकुल एवं भयभीत हो जाता है ,ऐसी अवस्था मे आपको भयभीत या व्याकुल होने की आवश्यकता नही है आपको जो प्रयोग विधी बताई जा रही है उसका उसके अनुसार कार्य सिद्धि करे ,भगवान महाकाल के आशीर्वाद से आपकीं समस्या का समाधान होगा।
विधि:-मंगलवार या रविवार की दोपहर 11:25 से 12:25 (अभिजित मुहूर्त) के काल मे,किसी बड़े वृक्ष जैसे बरगद,जामुन,पीपल आदि ,मुलतः आशय यह है कि वृक्ष कांटे दार नही होना चाहिए ऐसे वृक्ष को एकांत में नारियल,अगरबतरी, जल प्रदान कर अपना दु:ह स्वप्न बता देना चाहिए।स्मरण रहे प्रार्थना ऐसी हो कि आपके होंठ तो हिले किन्तु वाणी आपके कान तक नही पहुचे ।प्रार्थना को बुदबुदाना है।प्रार्थना बोलने के पहले आप मौली धागा से वृक्ष पे गोल रूप से बांधे।धागा एक बंडल ले किसी प्रकार की गांठ ना लगाए।
बस हो गई विधि,इस विधि से चमत्कारी लाभ होता है।
व्यक्तिगत अनुभूति एवं विचार©2022
🙏🏻🚩 @जयश्री महाकाल 🚩🙏🏻
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बगलामुखी_दिगबन्ध

बगलामुखी_दिगबन्ध
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बगलामुखी साधना से पूर्व हमे दिगबन्ध कर लेना चहिये ,ये सुरक्षा है।दिग्बन्धन सब को ज्ञात हो इसके लिए वो विधि आपको प्रदान की जा रही हैं। 
अपने सभी और अक्षत फेकते हुवे और निम्न देवियों की कल्पना अपनी चारो और करे की यह रक्षा कर रहे हैं हर दिशा में चिट्काव करते समय एक एक मंत्र का पाठ करे।।
दिगबन्ध मंत्रं
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ॐ ऐं ह्लीं श्रीं श्यामा माम् पूर्वतः पातु,
ॐ ऐं ह्लीं श्रीं आग्नेयां पातु तारिणी।।
ॐ ऐं ह्लीं श्रीं महाविद्या दक्षिणे पातु,
ॐ ऐं ह्लीं श्रीं नैऋत्यां षोडशी तथा।।
ॐ ऐं ह्लीं श्रीं भुवनेशी पश्चिमायाम,
ॐ ऐं ह्लीं श्रीं वायव्यां बगलामुखी।।
ॐ ऐं ह्लीं श्रीं उत्तरे छिन्नमस्ता च,
ॐ ऐं ह्लीं श्रीं ऐश्यान्याम धूमावती तथा।।
ॐ ऐं ह्लीं श्रीं उर्ध्व तु, कमला पातु
ॐ ऐं ह्लीं श्रीं अन्तरिक्षं सर्वदेवताः।।
ॐ ऐं ह्लीं श्रीं अधस्ताच्चैव मातंगी,
ॐ ऐं ह्लीं श्रीं सर्वदिङ्गबगलामुखी।।
।।इति दिग बंधन।।
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इस लेख में वर्णित नियम ,सूत्र,व्याख्याए,तथ्य गुरू एवं साधु-संतों के कथन,ज्योतिष-तांत्रिक-आध्यात्मिक-साबरी ग्रंथो एवं स्वयं के अभ्यास अनुभव के आधार पर मात्र शैक्षणिक उद्देश्यों हेतु दी जाती है।अतः बिना गुरु के निर्देशन के साधनाए या प्रयोग ना करे।विवाद की स्थिति में न्यायलय क्षेत्र दुर्ग छत्तीसगढ़,भारत