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शुक्रवार, 14 जनवरी 2022
ज्योतिष_में_हैं_32_प्रकार_के_राजयोग_एवम_सिद्धांत
गुरुवार, 13 जनवरी 2022
काली_और_दक्षिण_काली_में_क्या_अंतर_है
धन_के_नुकसा_से_कैसे_बचें_एवं_धन_प्राप्ति_उपाय
श्रीगणेश_वंदना_कवच_पंचरत्नस्तोत्र_एवं_मंत्र_संग्रह
तिलक_लगाने_का_महत्व_एवं_विधि
श्रीविन्ध्येश्वरी_स्तोत्र_चालीसा_एवं_मंत्रसंग्रह
#श्रीविन्ध्येश्वरी_स्तोत्र_चालीसा_एवं_मंत्रसंग्रह
#श्रीविन्ध्येश्वरी_स्तोत्र
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निशुम्भशुम्भमर्दिनीं प्रचण्डमुण्डखण्डिनीम्।
वने रणे प्रकाशिनीं भजामि विन्ध्यवासिनीम्।।1।
त्रिशूलरत्नधारिणीं धराविघातहारिणीम्।
गृहे गृहे निवासिनीं भजामि विन्ध्यवासिनीम।।2।।
दरिद्रदु:खहारिणीं सतां विभूतिकारिणीम्।
वियोगशोकहारिणीं भजामि विन्ध्यवासिनीम्।।3।।
लसत्सुलोलचनां लतां सदावरप्रदाम्।
कपालशूलधारिणीं भजामि विन्ध्यवासिनीम्।।4।।
करे मुदा गदाधरां शिवां शिवप्रदायिनीम्।
वरावराननां शुभां भजामि विन्ध्यवासिनीम्।।5।।
ऋषीन्द्रजामिनप्रदां त्रिधास्यरूपधारिणिम्।
जले स्थले निवासिनीं भजामि विन्ध्यवासिनीम्।।6।।
विशिष्टसृष्टिकारिणीं विशालरूपधारिणीम्।
महोदरां विशालिनीं भजामि विन्ध्यवासिनीम्।।7।।
प्रन्दरादिसेवितां मुरादिवंशखण्डिनीम्।
विशुद्धबुद्धिकारिणीं भजामि विन्ध्यवासिनीम्।।8।।
*****।।इति श्रीविन्ध्येश्वरीस्तोत्रं सम्पूर्णम् ।।********
#श्रीविन्ध्येश्वरी_स्तोत्र_का_हिंदी_में_अर्थ
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अर्थ – शुम्भ तथा निशुम्भ का संहार करने वाली, चण्ड तथा मुण्ड का विनाश करने वाली, वन में तथा युद्ध स्थल में पराक्रम प्रदर्शित करने वाली भगवती विन्ध्यवासिनी की मैं आराधना करता हूँ.।।1।।
अर्थ – त्रिशूल तथा रत्न धारण करने वाली, पृथ्वी का संकट हरने वाली और घर-घर में निवास करने वाली भगवती विन्धवासिनी की मैं आराधना करता हूँ।।2।।.
अर्थ – दरिद्रजनों का दु:ख दूर करने वाली, सज्जनों का कल्याण करने वाली और वियोगजनित शोक का हरण करने वाली भगवती विन्ध्यवासिनी की मैं आराधना करता हूँ.।।3।।
अर्थ – सुन्दर तथा चंचल नेत्रों से सुशोभित होने वाली, सुकुमार नारी विग्रह से शोभा पाने वाली, सदा वर प्रदान करने वाली और कपाल तथा शूल धारण करने वाली भगवती विन्ध्यवासिनी की मैं आराधना करता हूँ.।।4।।
अर्थ – प्रसन्नतापूर्वक हाथ में गदा धारण करने वाली, कल्याणमयी, सर्वविध मंगल प्रदान करने वाली तथा सुरुप-कुरुप सभी में व्याप्त परम शुभ स्वरुपा भगवती विन्ध्यवासिनी की मैं आराधना करता हूँ.।।5।।
अर्थ – ऋषि श्रेष्ठ के यहाँ पुत्री रुप से प्रकट होने वाली, ज्ञानलोक प्रदन करने वाली, महाकाली, महालक्ष्मी तथा महासरस्वती रूप से तीन स्वरुपों धारण करने वाली और जल तथा स्थल में निवास करने वाली भगवती विन्ध्यवासिनी की मैं आराधना करता हूँ.।।6।।
अर्थ – विशिष्टता की सृष्टि करने वाली, विशाल स्वरुप धारण करने वाली, महान उदर से सम्पन्न तथा व्यापक विग्रह वाली भगवती विन्ध्यवासिनी की मैं आराधना करता हूँ.।।7।।
अर्थ – इन्द्र आदि देवताओं से सेवित, मुर आदि राक्षसों के वंश का नाश करने वाली तथा अत्यन्त निर्मल बुद्धि प्रदान करने वाली भगवती विन्ध्यवासिनी की मैं आराधना करता हूँ.।।8।।
विशेष:-जो भी व्यक्ति श्रद्धा तथा विश्वास के साथ नियमित रुप से 9 दिन तक इस स्तोत्र का जाप करता है उसे जीवन में अपार सफलता प्राप्त होती है. धन-धान्य, सुख-समृद्धि, वैभव, पराक्रम तथा सौभाग्य में वृद्धि होती है.
माँ विन्ध्येश्वरी देवी का ये स्तोत्र गीताप्रेस,गोरखपुर से प्रकाशित ग्रंथ "देवी स्तोत्र रत्नाकर" पर आधारित है।यह एक संकलित स्तोत्र है अतः इस स्तोत्र के रचयिता के नाम का ज्ञान नही है।माँ विन्ध्यासिनी त्रिकोण यन्त्र पर स्थित तीन रूपों को धारण करती हैं जहां स्वयं माँ आदिशक्ति महालक्ष्मी विंध्यवासिनी के रूप में, अष्टभुजी अर्थात महासरस्वती और कालीखोह स्थित महाकाली के रूप में विराजमान हैं। मान्यता अनुसार सृष्टि आरंभ होने से पूर्व और प्रलय के बाद भी इस क्षेत्र का अस्तित्व कभी समाप्त नहीं हो सकता।
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#श्रीविन्ध्येश्वरी_चालीसा ॥
दोहा
नमो नमो विन्ध्येश्वरी नमो नमो जगदंबे ।
संतजनो कर काज में,मां करती नही विलंब।।
संतजनो के काज में मां करती नहीं विलंभ ॥
जय जय जय विन्ध्याचल रानी । आदि शक्ति जग विदित भवानी ॥
सिंहवाहिनी जै जग माता । जय जय जय त्रिभुवन सुखदाता ॥
कष्ट निवारिनी जय जग देवी । जय जय जय जय असुरासुर सेवी ॥
महिमा अमित अपार तुम्हारी । शेष सहस मुख वर्णत हारी ॥
दीनन के दुःख हरत भवानी । नहिं देख्यो तुम सम कोई दानी ॥
सब कर मनसा पुरवत माता । महिमा अमित जगत विख्याता ॥
जो जन ध्यान तुम्हारो लावै । सो तुरतहि वांछित फल पावै ॥
तू ही वैष्णवी तू ही रुद्राणी । तू ही शारदा अरु ब्रह्माणी ॥
रमा राधिका शामा काली । तू ही मात सन्तन प्रतिपाली ॥
उमा माधवी चण्डी ज्वाला । बेगि मोहि पर होहु दयाला ॥
तू ही हिंगलाज महारानी । तू ही शीतला अरु विज्ञानी ॥
दुर्गा दुर्ग विनाशिनी माता । तू ही लक्श्मी जग सुखदाता ॥
तू ही जान्हवी अरु उत्रानी । हेमावती अम्बे निर्वानी ॥
अष्टभुजी वाराहिनी देवी । करत विष्णु शिव जाकर सेवी ॥
चोंसट्ठी देवी कल्यानी । गौरी मंगला सब गुण खानी ॥
पाटन मुम्बा दन्त कुमारी । भद्रकाली सुन विनय हमारी ॥
वज्रधारिणी शोक नाशिनी । आयु रक्शिणी विन्ध्यवासिनी ॥
जया और विजया बैताली । मातु सुगन्धा अरु विकराली ।
नाम अनन्त तुम्हार भवानी । बरनैं किमि मानुष अज्ञानी ॥
जा पर कृपा मातु तव होई । तो वह करै चहै मन जोई ॥
कृपा करहु मो पर महारानी । सिद्धि करिय अम्बे मम बानी ॥
जो नर धरै मातु कर ध्याना । ताकर सदा होय कल्याना ॥
विपत्ति ताहि सपनेहु नहिं आवै । जो देवी कर जाप करावै ॥
जो नर कहं ऋण होय अपारा । सो नर पाठ करै शत बारा ॥
निश्चय ऋण मोचन होई जाई । जो नर पाठ करै मन लाई ॥
अस्तुति जो नर पढ़े पढ़ावे । या जग में सो बहु सुख पावै ॥
जाको व्याधि सतावै भाई । जाप करत सब दूरि पराई ॥
जो नर अति बन्दी महं होई । बार हजार पाठ कर सोई ॥
निश्चय बन्दी ते छुटि जाई । सत्य बचन मम मानहु भाई ॥
जा पर जो कछु संकट होई । निश्चय देबिहि सुमिरै सोई ॥
जो नर पुत्र होय नहिं भाई । सो नर या विधि करे उपाई ॥
पांच वर्ष सो पाठ करावै । नौरातर में विप्र जिमावै ॥
निश्चय होय प्रसन्न भवानी । पुत्र देहि ताकहं गुण खानी ।
ध्वजा नारियल आनि चढ़ावै । विधि समेत पूजन करवावै ॥
नित प्रति पाठ करै मन लाई । प्रेम सहित नहिं आन उपाई ॥
यह श्री विन्ध्याचल चालीसा । रंक पढ़त होवे अवनीसा ॥
यह जनि अचरज मानहु भाई । कृपा दृष्टि तापर होई जाई ॥
जय जय जय जगमातु भवानी । कृपा करहु मो पर जन जानी ॥
**********श्री विन्ध्येश्वरी चालीसा संपूर्ण*************
#आरती_श्रीविन्ध्येश्वरीजी_की
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सुन मेरी देवी पर्वत वासिनी तेरा पार न पाया ॥
पान सुपारी ध्वजा नारियल ले तरी भेंट चढ़ाया । सुन.।
सुवा चोली तेरे अंग विराजे केसर तिलक लगाया । सुन.।
नंगे पग अकबर आया सोने का छत्र चढ़ाया । सुन.।
उँचे उँचे पर्वत भयो दिवालो नीचे शहर बसाया । सुन.।
कलियुग द्वापर त्रेता मध्ये कलियुग राज सबाया । सुन.।
धूप दीप नैवेद्य आरती मोहन भोग लगाया । सुन.।
ध्यानू भगत मैया तेरे गुण गावैं मनवांछित फल पाया । सुन.।
*********आरती श्री विन्ध्येश्वरी जी की सम्पूर्ण*********
#देवी_का_शक्तिशाली_आत्मरक्षामंत्र
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ॐ क्षीं क्षीं क्षीं क्षीं क्षीं फट्'
#देवी_का_स्त्री_सौभाग्यवर्धक_मंत्र
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ॐ ह्रीं कपालिनि कुल कुण्डलिनि मे सिद्धि देहि भाग्यं देहि देहि स्वाहा।।
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🙏🏻🚩जयश्री महाकाल🚩🙏🏻
लेखक एवं संकलनकर्ता
।। #राहुलनाथ ।।™ (ज्योतिष एवं वास्तुशास्त्री)
शिवशक्ति_ज्योतिष_एवं_अनुष्ठान,भिलाई,छत्तीसगढ़, भारत
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#चेतावनी:-इस लेख में वर्णित नियम ,सूत्र,व्याख्याए,तथ्य गुरू एवं साधु-संतों के कथन,ज्योतिष-तांत्रिक-आध्यात्मिक-साबरी ग्रंथो एवं स्वयं के अभ्यास अनुभव के आधार पर मात्र शैक्षणिक उद्देश्यों हेतु दी जाती है।इसे मानने के लिए आप बाध्य नही है।अतः बिना गुरु के निर्देशन के साधनाए या प्रयोग ना करे।विवाद या किसी भी स्थिती में लेखक जिम्मेदार नही होगा।विवाद की स्थिति में न्यायलय क्षेत्र दुर्ग छत्तीसगढ़,भारत।
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दुर्गा_सप्तशती_के_बीज_एवं_वशीकरण_मंत्रो_का_संग्रह
#दुर्गा_सप्तशती_के_बीज_एवं_वशीकरण_मंत्रो_का_संग्रह
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#दुर्गा_सप्तशती_बीज_मंत्र_खण्ड
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कुल सात सौ प्रयोगें के श्लाकों वाले दुर्गा सप्तशती में मारण के 90, मोहन के 90, उच्चाटन के 200, स्तंभन के 200, विद्वेषण के 60 और वशीकरण के 60 प्रयोग होते हैं। इसी कारण इसे सप्तशती कहा जाता है। जैसा कि आप सब में से अधिकतर लोग इस बात को जानते ही होंगे कि हमारे हिंदू धर्म में सबसे प्रमुख देवी जिनको माना जाता है वह मां दुर्गा है। मां दुर्गा को देवी शक्ति और जगदंबा के नाम से भी जाना जाता है। मां दुर्गा शाक्त संप्रदाय की प्रमुख एवं मुख्य देवी है और मां दुर्गा एकमात्र ऐसी देवी है जिनकी तुलना स्वयं परम ब्रह्म (ब्रम्हा) से की जाती है। मां दुर्गा के बारे में यह मान्यताएं प्रख्यात हैं कि वह सुख, शांति, समृद्धि तथा धर्म पर आघात करने वाले दुष्ट राक्षस और बुरी शक्तियों का विनाश करती है।
मां दुर्गा के वैसे तो कई रूप हैं पार्वती, लक्ष्मी, सावित्री पर इन सबसे अलग मां दुर्गा का मुख्य रूप गौरी है, इसका मतलब शांत, सुंदर और गोरा रूप होता है। मां दुर्गा का सबसे भयानक रूप जो है वह है मां काली का जिसका अर्थ होता है काला रूप। मां दुर्गा शेर की सवारी करती है और उनकी आठ भुजाएं हैं और हर भुजाओं में कोई ना कोई शस्त्र होते हैं।
दुर्गा सप्तशती में वर्णित कवच को बीज , अर्गला को शक्ति और कीलक को कीलक कहा गया है।
दुर्गा सप्तशती के मंत्र बहुत ही चमत्कारी हैं अगर विधि-विधान से इनका जाप किया जाए तो असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं। ये मंत्र बहुत ही जल्दी असर दिखाते हैं। (दुर्गा सप्तशती के मंत्र बहुत ही शीघ्र असर दिखाते हैं, यदि आप मंत्रों का उच्चारण ठीक से नहीं कर सकते तो किसी योग्य ब्राह्मण से इन मंत्रों का जाप करवाएं, अन्यथा इसके दुष्परिणाम भी हो सकते हैं।
जाप विधि– सुबह जल्दी उठकर साफ वस्त्र पहनकर सबसे पहले माता दुर्गा की पूजा करें। इसके बाद अकेले में कुशा (एक प्रकार की घास) के आसन पर बैठकर लाल चंदन के मोतियों की माला से इन मंत्रों का जाप करें।
इन मंत्रों की प्रतिदिन 5 माला जाप करने से मन को शांति तथा प्रसन्नता मिलती है। यदि जाप का समय, स्थान, आसन, तथा माला एक ही हो तो यह मंत्र शीघ्र ही सिद्ध हो जाते हैं।
#कवच_के_रूप_में_बीज_मंत्र
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या चण्डी मधुकैटभादिदैतयदलनी या माहिषोन्मूलिनी।
या धुम्रेक्षणचण्डमण्ड मथनी या रक्तबीजशनी।।
शक्ति शुम्भनिशुम्भ दैयदलनी या सिद्धिदात्री परा।
सा देवी नवकोटिमूर्तसहिता मां पातु विश्वेश्वरी।।
इस बीज मेंत्र में अपार शक्ति समाहित है और इसके प्रभाव से हर बाधाएं दूर होती हैं। समस्त दोषों से छुटकारा मिलने के साथ-साथ जीवन सुखमय बन जाता है। इसका लाभ गुरु के सानिध्य में साधना और मंत्र जाप से मिलता है। इसी के साथ देवी दुर्गा के सभी
#नौ_रूपों_के_बीज_मंत्र
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शैलपुत्रीः ह्रीं शिवायै नमः!
ब्रह्मचारिणीः ह्रीं श्रीं अम्बिकायै नमः!
चंद्रघंटाः ऐं श्रीं शक्तयै नमः!
कूष्मांडाः ऐं ह्रीं देव्यै नमः!
स्कंदमाताः ह्रीं क्लीं स्वमिन्यै नमः!
कात्यायनीः क्लीं श्री त्रिनेत्रायै नमः!
कालरात्रिः क्लीं ऐं श्री कालिकायै नमः!
महागौरीः श्री क्लीं ह्रीं वरदायै नमः!
सिद्धिदात्रीः ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नमः!
#दुर्गा_मंत्र_साधना
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मां दुर्गा के मंत्रों की वैदिक रीति द्वारा साधना के अनुसार जाप करने से हर तरह की मनोकामना पूर्ति संभव है। मां दुर्गा के मूर्ति या तस्वीर की पंचोपचार द्वारा पूजा कर तुलसी या चंदन की माला से जाप करना चाहिए। अलग-अलग मनोकामनाओं के मंत्र अलग-अलग इस प्रकार हैंः-
#सर्व_विध्ननाशक
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सर्वबाधा प्रशमनं त्रिलोक्यस्यखिलेश्वरी।
एवमेय त्वया कार्य मस्माद्वैरि विनाशनम्।।
#भय_मुक्ति_और_ऐश्वर्य_प्राप्ति
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ऐश्वर्य यत्प्रसादेन सौभाग्य-आरोग्य सम्पदः।
शत्रु हानि परोमोक्षः स्तुयते सान किं जनै।।
#विपत्ति_नाशक
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शरणगतर्दिनात्र परित्राण पारायण्ये।
सर्वस्यार्ति हरे देवि नारायणि नमस्तुते।।
#पाप_मुक्ति_हेतु
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हिनस्ति दैत्यतेजांसि स्वनेनापूर्य या जगत् ।
सा घण्टा पातु नो देवि पापेभ्योऽन: सुतानिव ॥
#कार्य_सिद्धि
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दुर्गे देवी नमस्तुभ्यं सर्वकामार्थसाधिके।
मम सिद्धिंमसिद्धिं व स्वप्ने सर्वं प्रदर्शय।।
#दरिद्रता_नाशक
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ॐ दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तो:।
स्वस्थै: स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि ।।
दारिद्र्यदु:खभयहारिणि का त्वदन्या।
सर्वोपकारकरणाय सदाऽऽर्द्रचित्ता ॥१।।
#निरोगता_और_सौभाग्य
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देहि सौभाग्यं आरोग्यं देहि में परम सुखम्,
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषोजहि।।
#सर्व_कलयाण
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सर्व मंगल मांगल्ये शिवे स्वार्थ साधिके।
शरण्ये´्ंबके गौरी नारायणी नमोस्तुते।।
#संतान"_प्राप्ति_और_बाधा_मुक्तिः
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सर्वाबाधा विनिर्मुक्तो धन धान्य सुतान्वितः।
मनुष्यों मत्प्रसादेन भविष्यति न संशय।।
#शत्रु_नाश
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ऊँ ह्लीं बगलामुखी सर्वदुष्टानं
वाचंमुखं पदं स्तंभय जिह्वाम् कीलय बुद्धिविनाशाय ह्लीं ऊँ स्वाहा।
#सुलक्षणापत्नी
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पत्नीं मनोरमां देही मनोवृत्तानुसारिणीम्,
तारिणीं दुर्ग संसारसागरस्य कुलोद्भवाम्।।१।।
हे गौरी शंकरधंगी, यथा तवं शंकरप्रिया ।
तथा मां कुरु कल्याणी, कान्तकान्तम् सुदुर्लभं ।।२।।
#दुःख_बाधा_दूर_करने_हेतु
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सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके ।
शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते ।।१।।
ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी ।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते ।।२।।
#अन्य_इच्छापुरक_मंत्र
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या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।१।।
या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।२।।
या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।३।।
या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।४।।
या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।५।।
या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।६।।
या देवी सर्वभूतेषु शांतिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।७।।
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#वशीकरण_मंत्र_खंड
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वशीकरण अर्थात सम्मोहन या आकर्षण प्रयोग के विविध मंत्रों में देवी दुर्गा वशीकरण मंत्र भी विशिष्ट व अचूक प्रभाव वाले होते हैं। उनके कुछ सरलता के साथ सामान्य जाप किए जाते हैं, तो कुछ पूरी तरह से विधि-विधान के साथ विशेष वैदिक या तांत्रिक अनुष्ठान के बाद प्रयोग में लाए जाते हैं। इसके प्रयोगों से अगर स्वाभाव, आचरण या व्यवहार से अनियंत्रत हो चुके किसी व्यक्ति को अपने नियंत्रण में लाया जा सकता है तो रूठे निकट संबंध के व्यक्ति का मान-मनव्वल भी संभव है। वैचारिक और भावनात्मक मतभेद से बिगड़े चुके दांपत्य संबंध हों या फिर अनैतिकता की राह पर भटके हुए परिवार का कोई सदस्य, उन्हें सही राह पर लाया जा सकता है। इनसे प्रेम-संबंध की मधुरता भी बढ़ाई जा सकती है। महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित मार्कण्डेय पुराण की धार्मिक पुस्तक दुर्गा सप्तशती के कई अनुभव सिद्ध मंत्र बहुत ही उपयोगी हैं। कामनापूर्ति के कुल 13 अध्यायों में आठवां मिलाप और वशीकरण के लिए है, जिनमें एक अचूक असर देने वाला एक मंत्र इस प्रकार हैं"||
#वशीकरण_मंत्र
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ॐ ज्ञानि न मपि चेतान्शी देवी भग्वति हिसा ।
ग्रहा बलादा कृष्य मोहाय महामाया प्रयक्षति. ।।
#विधि
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इस मंत्र का प्रयोग करने से पहले भगवती त्रिपुर सुंदरी मां महामाया का एकग्रता से ध्यान किया जाता है। ध्यान के बाद उनकी पूरी तरह से श्रद्धा-भक्ति के साथ पंचोपकार विधि से पूजा कर उनके सामने अपनी मनोकामन की इच्छा व्यक्त की जाती है। जिस किसी के ऊपर वशीकरण के प्रयोग करने हों उसका नाम लेते हुए मंत्र का 21, 51 या 108 बार जाप किया जाता है। इस अनुष्ठान के समय लाल रंग के प्रयोग महत्वपूर्ण है। इस संदर्भ में लाल आसन, लाल फूल और जाप के लिए उपयोग में आने वाली लाल चंदन की माला है। इसका प्रयोग अनैतिक कार्य यानि किसी को हानि पहुंचाने के उद्देश्य करने की सख्त मनाही है। अन्यथा यह मंत्र पलटवार भी कर सकता है।प्रबल आकर्षण वशीकरण के लिए निम्न मंत्र का 10 हजार जप कर 1,000 आहुति से हवन करें। संकल्प में नाम बोलें, कार्य होगा।
#अन्य_वशीकरण_साबर_मंत्र
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ओम नमो काला भैरूं,
काली रात, काला चाल्या आधी रात,
काला रेत मेरा वीर,
पर नारी के राखे सीर, बेगी जा छाती धर ला,
सूती हो जो जगाय ला,
शब्द सांचा पिण्ड कांचा पफूरो मंत्रा ईश्वरी वाचा।
(४३दिन१०८पाठ)
#वशीकरण_मंत्र
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ओम जल मोहूं, थल मोहूं, जंगल की हिरणी मोहूं,
बाट चलंता बटोही मोहूं, कचहरी बैठी राजा मोहूं,
पीढ़ा बैठी रानी मोहूं, मोहनी मेरा नाम,
मोहूं जग संसार, तारा तरीला तोतला तीनों बसैं कपाल,
मस्तक बैठी मात के दुश्मन करूं पामाल,
मेरी भक्ति गुरु की शक्ति पुफरो मंत्र ईश्वरी वाचा।
(४३दिन१०८पाठ,इत्र पे फुकना है)
#वशीकरण_मंत्र
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ओम सत् नाम आदेश गुरु को,
लौंग तू मेरा भाई,चार लौंग ने शक्ति चलाई,
पहली लौंग राती माता,दूजी लौंग जोबन जाती,
तीजी लौंग अंग मरोड़े,चैथी लौंग दोऊ कर जोड़े,
चारो लौंग जो मेरी खाए,
अमुकी अमुक के पास चली आए,
मेरी भक्ति गुरु की शक्ति फूरो मंत्र ईश्वरी वाचा।
(रविवार से प्रारम्भ करे,३१दिन43पाठ,४ लौंग पे)
#वशीकरण_मंत्र
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ओम नमो धूलि धूलि,
विकट चांदनी पर मारूं धूलि।
धूलि लगे, बने दीवानी।
घर तजे, बाहर तजे।
ठाडा तजे भर्तार दीवानी।
तू नाहरसिंह वीर अमुक को उठाय लाव।
न लाय तो हनुमान वीर की दुहाय।
मेरी भक्ति, गुरु की शक्ति, फुरो मंत्र ईश्वरोवाचा।
(शानिवार,1108 पाठ अभिमंत्रित करे,शनिवार को स्त्री की चिता की भस्म पे,ये तामसिक एवं असामाजिक कृत्य है हो सके तो इसे मात्र ज्ञानार्थ ही ले)
माता की नौ शक्तियों की साधना के लिए नौ विभिन्न मंत्र बताए गए हैं जिनकी साधना शक्ति उपासना पर्व नौरात्र में की जाती है। वे इस प्रकार हैंः-
1.#शैलीपुत्री
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वंदे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारुदढां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्।।
2.#ब्रह्मचारिणी
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दधाना करपद्माभ्याम क्षमालाकमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।
3.#चंद्रघंटा
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पिण्डजप्रवरारुढ़ा चण्डकोपास्तकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यां चंद्रघण्टेति विश्रुता।।
4.#कुष्माण्डा
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सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्मभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे।।
5.#स्कंदमाता
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सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कंदमाता यशस्विनी।।
6. #कत्यायनी
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चंद्रहासोज्वलकरा शर्दूलवरवाहना।
कत्यायनी शुभं दद्यादेवी दानवघातिनी।।
7. #कालरात्री
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एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।
लम्बोष्ठी कर्णिकाकार्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी।।
वामपादोल्लोहलताकण्टकभूषण।
वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङक्री।।
8. #महागौरी
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श्वेते वृषे समारुढा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यन्महादेवप्रमोददा।।
9. #सिद्धिदात्री
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सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।
सेव्यमाना सदा भूयात्
#तीव्र_दुर्गा_साधना_का_मंत्र
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ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे,
ऊँ ग्लौं हूं क्लीं जूं सः ,
ज्वालय-ज्वालय, ज्वल-ज्वल प्रज्ज्वल-प्रज्ज्वल,
ऐं ह्रीं क्लीं चमुण्डायै विच्चे, ज्वल हं सं लं क्षं फट स्वाहा!!
#अष्टाक्षरी_मंत्र
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ऊँ ह्रीं दुं दुर्गायै नमः(स्वयं सिद्ध मंत्र)
#पोस्ट_श्रीदुर्गा_सप्तशती_अनुसार
क्रमशः.......
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🙏🏻🚩जयश्री महाकाल🚩🙏🏻
लेखक एवं संकलनकर्ता
।। #राहुलनाथ ।।™ (ज्योतिष एवं वास्तुशास्त्री)
शिवशक्ति_ज्योतिष_एवं_अनुष्ठान,भिलाई,छत्तीसगढ़, भारत
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#चेतावनी:-इस लेख में वर्णित नियम ,सूत्र,व्याख्याए,तथ्य गुरू एवं साधु-संतों के कथन,ज्योतिष-तांत्रिक-आध्यात्मिक-साबरी ग्रंथो एवं स्वयं के अभ्यास अनुभव के आधार पर मात्र शैक्षणिक उद्देश्यों हेतु दी जाती है।इसे मानने के लिए आप बाध्य नही है।अतः बिना गुरु के निर्देशन के साधनाए या प्रयोग ना करे।विवाद या किसी भी स्थिती में लेखक जिम्मेदार नही होगा।विवाद की स्थिति में न्यायलय क्षेत्र दुर्ग छत्तीसगढ़,भारत।
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